संयुक्त राष्ट्र का विकास कैसे हुआ? भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य कैसे बना?





संयुक्त राष्ट्र की स्थापना वैसे तो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 24 अक्टूबर 1945 को हुई थी, लेकिन इसके विकास की पृष्ठभूमि लम्बी है। संयुक्त राष्ट्र एक अन्तर्राष्ट्रीय संगठन है तथा अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों की उत्पत्ति प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) से मानी जाती है। प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन के प्रयासों से 1920 में लीग आफ नेशन्स अथार्त राष्ट्र संघ की स्थापना हुई, जिसे 1920 में हस्ताक्षरित वार्साय की सन्धि में स्थान दिया गया। लेकिन राष्ट्र संघ जर्मनी तथा इटली की आक्रमक नीतियों को नही रोक पाया तथा सितम्बर, 1939 में दुनिया को दूसरे विश्व युद्ध का सामना करना पडा।
राष्ट्र संघ की असफलताओं से सीख लेकर द्यितीय विश्व युद्ध के दौरान ही उस समय की प्रमुख शक्तियों जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन तथा फ्रांस आदि द्वारा एक नये संगठन संयुक्त राष्ट्र की स्थापना पर विचार किया गया। इस प्रकार से संयुक्त राष्ट्र संघ वास्तव में राष्ट्र संघ का उत्तराधिकारी है। इसके बाद 19 अप्रिल 1946 को राष्ट्र संघ को भंग कर दिया गया।    
 संयुक्त राष्ट्र का विकास कैसे हुआ?

संयुक्त राष्ट्रका विकास 1941 में शुरू हुए कई चरणों में हुआ। समय के क्रम में मुख्य घटनाएँ इस प्रकार हैं:

1.    सेंट जेम्स पैलेस (लंदन) घोषणा – जून 1941 – 12 जून 1941 को लंदन में हस्ताक्षरित, ‘इंटर-एलाइड घोषणा’ संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की दिशा में पहला कदम था। इसमें युद्ध के उद्येश्यों तथा य़द्ध के बाद मित्र राष्ट्रों में सहयोग की बात तय की गई थी।

2.    अटलांटिक चार्टर, अगस्त 1941 – अटलांटिक महासागर – 14 अगस्त 1941 को, अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डेलानो रूज़वेल्ट और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने अटलांटिक महासागर में एच0 एम0 एस0 प्रिंस ऑफ़ वेल्स नामक जहाज़ पर शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के सिद्धांतों का प्रस्ताव दिया।

3.    संयुक्त राष्ट्र की घोषणा, 1942 – वाशिंगटन – 1 जनवरी 1942 को, 26 मित्र देशों (Allied nations) के प्रतिनिधियों ने वाशिंगटन में मुलाकात की और अटलांटिक चार्टर का समर्थन किया। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) नाम इसी घोषणा से लिया गया है। इस नाम का प्रस्ताव अमेरिका के राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने दिया था।

4.    मॉस्को सम्मेलन, अक्टूबर 1943 – 30 अक्टूबर 1943 को सोवियत संघ, ब्रिटेन, अमेरिका और चीन द्वारा मॉस्को घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन की शीघ्र स्थापना  पर सहमति बनी।

5.    तेहरान सम्मेलन, दिसंबर 1943 – 1 दिसंबर 1943 को हस्ताक्षरित तेहरान घोषणा में संयुक्त राष्ट्रकी स्थापना के लक्ष्य को फिर से दोहराया गया।

6.    डंबार्टन ओक्स (वाशिंगटन, अमेरिका) सम्मेलन, अक्टूबर 1944 – अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और रूस के नेताओं के बीच कई बैठकों के बाद 07 अक्टूबर को घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए; इसमें संयुक्त राष्ट्रके उद्देश्यों, संरचना और कार्यों के साथ उसका पहला ड्राफ्ट (ब्लूप्रिंट) तैयार किया गया। उल्लेखनीय है कि कि फ्रांस अभी तक हुई किसी में शामिल नहीं था।

7.    याल्टा सम्मेलन, 1945 – 11 फरवरी को, अमेरिका, ब्रिटेन और रूस के नेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक अंग के रूप में सुरक्षा परिषद (Security Council) की संरचना पर सहमति व्यक्त की।

8.    सैन फ़्रांसिस्को सम्मेलन (25 अप्रैल से 25 जून 1945) – 51 देशों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र का 111 अनुच्छेदों वाला चार्टर तैयार किया, जिस पर 26 जून 1945 को सैन फ़्रांसिस्को में 50 देशों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किये। पोलैंड ने 15 अक्टूबर 1945 को इस पर हस्ताक्षर किये। इसीलिये इन्हीं 51 देशों को संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य माना जाता है।

भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य क्यों है?

      भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य है।  भारत के प्रतिनिधि मंडल ने संयुक्त राष्ट्र की घोषणा से संबन्धित 1941 के वाशिंगटन सम्मेलन में भाग लिया था तथा 1 जनवरी 1942 को संयुक्त राष्ट्र की घोषणा, 1942 में हसतक्षर किये थे। बाद में भारत के प्रतिनिधिमंडल ने 1945 के सैनफ्रान्सिसको सम्मेलन में भी भाग लिया था। इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के चार्टर पर संस्थापक देशों द्वारा हस्ताक्षर किये गये थे। उल्लेखनीय है कि भारत की ओर से इस चार्टर पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल के नेता रामास्वामी मुदलियार ने हस्ताक्षर किए थे। इसीलिए भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य है।

दूसरी तरफ पाकिस्तान ने भी मांग की थी कि उसका उदय भारत से अलग होकर एक स्वतंत्र देश के रूप में हुआ है, इसीलिये उसे भी संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य माना जाना चाहिये। लेकिन संयुक्त राष्ट्र महास भा ने इस तर्क को स्वीकार नही किया था। अन्तर्राष्ट्रीय नयायालय ने भी अपना अभिमत दिया था कि संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता किसी देश को उत्तराधिकार में प्राप्त नही हो सकती है। अतः पाकिस्तान को अलग से संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता के लिये आवेदन करना पड़ाा इस आवेदन के आधार पर ही पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र का सउस्य बन सका। अतः पकिस्तान संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य नही है।

संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्य क्या हैं?

संयुक्त राष्ट्रका कामकाज संयुक्त राष्ट्रचार्टर के अनुसार चलता है, जिस पर 26 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को,  में हस्ताक्षर किए गए थे। यह चार्टर 24 अक्टूबर 1945 (संयुक्त राष्ट्रदिवस) को लागू हुआ।

संयुक्त राष्ट्रचार्टर में 111 अनुच्छेद (Articles) और एक प्रस्तावना (Preamble) है, जिसकी शुरुआत ‘संयुक्त राष्ट्र के हम लोग’ (We the People of United Nations) वाक्य से होती है। संयुक्त राष्ट्र  (United Nations) नाम का सुझाव US के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने 01 जनवरी 1942 को वाशिंगटन में ‘संयुक्त राष्ट्र की घोषणा’ (Declaration by the United Nations) के दौरान दिया था।

अनुच्छेद 1 में संयुक्त राष्ट्रके चार उद्देश्यों का उल्लेख है:

1.     अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना,

2.     राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करना,

3.     अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं को हल करने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करना, और

4.     उक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रों के कार्यों में सामंजस्य अनाने के एक केंद्र के रूप में कार्य करना।

संयुक्त राष्ट्रके सिद्धांत क्या हैं?

अनुच्छेद 2 में संयुक्त राष्ट्रके उन सात सिद्धांतों का उल्लेख है जिनका पालन सभी सदस्य देशों को करना है:

1.     सभी सदस्यों की संप्रभु समानता (Sovereign Equality)

2.     सभी सदस्यों द्वारा अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से पूरा करना।

3.     शांतिपूर्ण तरीकों से अपने अंतर्राष्ट्रीय विवादों का निपटारा करना।

4.     अन्य देशों के विरूद्ध बल प्रयोग या धमकी से बचना।

5.     संयुक्त राष्ट्र द्वारा की जाने वाली किसी भी कार्रवाई में सभी सदस्यों द्वारा हर संभव सहायता देना।

6.     संयुक्त राष्ट्र के गैर-सदस्य भी इन सिद्धांतों के अनुसार कार्य करेंगे।

7.     सदस्य देशों के घरेलू मामलों में संयुक्त राष्ट्र द्वारा कोई हस्तक्षेप न करना।

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