हूती विद्रोही कौन है? हूती लाल सागर में व्यापारिक पोतों पर क्यों हमला कर रहे हैं?

हूती यमन स्थित एक शिया उग्रवादी समूह है। यमन अरब प्रायद्वीप के दक्षिण- पूर्व में स्थित है। हूती शिया सम्प्रदाय की जैदी शाखा का अनुशरण करते है। हूती मुख्यतः यमन के उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र में निवास करते हैं। वर्तमान में यमन की कुल आबादी 3.2 करोड़ है, जिसमें शिया आबादी 35 प्रितशत है तो सुन्नी आबादी 65 प्रतिशत है।

अरब प्रायद्वीप में यमन की स्थिति- मानचित्र साभार ब्रिटानिका

हूती विद्रोही यम सरकार के विरूद्ध 2024 से ही संघर्ष कर रहे हैं। वे यमन की सरकार पर कब्जा कर अपने नियंत्रण में लेना चाहते है। इस प्रयास में उन्हें प्रमुख सफलता 2025 में मिली जब हूती समूह ने राजधनी सना में कब्जा कर लिया तथा पुरानी सरकार को राजधानी छोड़ना पड़ा। तब से लेकर दोनो के बीच निरन्तर हिंसक संघर्ष चल रहा है। पुरानी सरकार को साउदी अरब का समर्थन तथा अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय की मान्यता प्राप्त है, जबकि हूती समूह को ईरान का समर्थन प्राप्त है। पश्चिम एशिया में प्रमुत्व के लिये ईरान तथा साउदी अरब के बीच तनातनी चलती रहती है। 2015 के बाद हूती समूह नीवचे दिे गये मानचित्र के हरे हिस्से में अपना कब्जा बनायें हुये है।

यमन का मानचित्र, जिसमे हरा क्षेत्र हूती के नियंत्रण में है, गुलाबी क्षेत्र यमन की पुरानी सरकार के नियंत्रण में है तथा नीला क्षेत्र एक अन्य विद्राही समूह के नियंत्रण में है। साभार विकीपीडिया।

हूती लाल सागर पर जहाजें पर क्यों हमला कर रहे हैं?

लाल सागर पूर्व तथा पश्चिमी विश्व के बीच समुद्री यातायत का एक प्रमुख मार्ग है। स्वेज नहर के द्वारा लाल सागर को भूमध्य सागर से मिलाया गया है। दूसरी तरफ लाल सागर बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य तथा अदन की खाड़ी होते हुये अरब साबर से मिलता है। बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य एक संकरा रास्ता है तथा जहाजों का इस रास्ते से गुजरने के लिये बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य से भी गुजरना पड़ता है। यह रास्ता यमन स्थित हूती विद्राहियो की पहंच में है।

बाब अल मांडेब तथा अदन की खाड़ी– मानचित्र साभार- इन्डिया न्यूज

वर्तमान में ईरान का अमेरिका तथा इजराइल के साथ संघर्ष चल रहा है। साउदी अरब सहित अन्य अरब देशों में अमेरिका के सैनिक अड्डे हैं।ईरान का मामना है कि साउदी अरब तथा खाड़ी के अन्य देश इस युद्ध में अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका का साथ दे रहा है। अतः बदले की कार्यवाही में ईरान ने साउदी अरब सहित कई खाड़ी देशों पर भी हमले किये हैं। ईरान द्वारा हारमुज खाड़ी के बन्द होने के बाद साउदी अर ब ने अपने तेल का निर्यात लाला सागर से शुरू किया है। अतः युद्ध में अपनी बढ़त बनाने के लिये ईरान के उकसावे पर हूती समूह ने लाल साबर से गुजरने वाले जहाजों पर आक्रमण करना आरंभ किया है। हूती समूह का ईरान का सैनिक तथा राजनीतिक समर्थन प्राप्त है। लेकिन हूती की सैनिक कार्यवाही से भारत तथा अन्य देशों के जहाज भी आक्रमण का शिकार हा रहे हैं। भारत न इस संबन्ध में अपना प्रतिरोध भी जताया है।

उल्लेखनीय हे कि 2023 में जब इजराइल पे गाजा पर आक्रमण किया था तो गाजा के हमास तथा  फिलीस्तीनियों के समर्थन में हूती विद्राहियों ने लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर हमले किये थे। उनका उद्देश्य विश्व समुदाय तथा इजराइल पर गाजा में युद्ध रोकना था।

भारत की रणनीति

भारत ने अक्टूबर 2008 से सोमालिया से समुद्नी डकैती के खतरे का सामना करने के लिये अदन की खाड़ी में अपनी नौसेना तैनात कर रखी है। भारत ने 2019 में अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिये नौसेना का आपरेशन संकल्प नामक अभियान चलाया था जो आज भी संचालित है। आपरेशन संकल्प के अन्तर्गत 2024 में भारत ने हूती आक्रमण से जहाजों की लाल सागर में सुरक्षा के लिये अपनी नैसेना की तैनाती बढ़ा दी थी। वर्तमान में भारत द्वारा अपने जहाजो को लाल सागर व अदन की खाड़ी से सुरक्षित निकालने के लिये नौसेना का प्रयोग किया जा रहा है।

Responses

  1. Managing Director Avatar

    It’s a very much conceptually clear article. Thank you sir

  2. Arunoday Bajpai Avatar

    Thank you Sir,

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