उत्तरी समुद्र मार्ग (North Sea Route) क्या है? भारत उत्तरी समुद्र मार्ग में क्यों रूचि रखता है?

तेरह अगस्त, 2026 को रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन ने रूस में जोर देकर कहा है कि अन्य देशों के अलावा भारत ने उत्तरी समुद्र मार्ग में गहरी रूचि दिखाई है तथा रूस भारत के साथ इस संबन्ध में सहयेाग करने के लिये तैयार है। पुतिन का यह बयान महत्वपूर्ण् है क्योंकि रूस के सहयोग के बिना के सहयोग के बिना कोई भी देश उत्तरी समुद्री मार्ग का प्रयोग नही कर सकता है। लगभग 5600 किलोमीटर लम्बे उत्तरी समुद्री रूट का लगभग पूरा हिस्सा रूस के तटीय अथवा अनन्य आर्थिक क्षेत्र (एक्सक्लूसिव इकानामिक जोन) से होकर गुजरता है।

पुतिन के उक्त बयान के आलोक में भारत के विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस कान्फ्रेंस, दिनांक 14 अगस्त 2026 में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रनधीर जैसवाल ने स्वीकार किया है कि नार्थ सी रूट सहित अन्य संपर्कता परियोजनाओं के विकास के लिये रूस के साथ निरन्तर बात-चीत चल रही है तथा भारत इन संपर्कता परियोजनाओं में रूचि रखता है।

उत्तरी समुद्र मार्ग क्या है?

उत्तरी समुद्र मार्ग नार्थ सी तथा बैरेन्ट सी से होते हुये अटलांटिक महासागर तथा तथा प्रशान्त महासागर को मिलाता है। इस समुद्री मार्ग का महत्व इसलिये बढ् गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तरी ध्रुव की बरफ पिघल रही है तथा यूरोप का उत्तरी भाग भाग जो पहले साल भर बर्फ से ढ़का रहता है अब जाड़ों के मौसम को छेड़कर अब समुद्र में बदल रहा है तथा वहां अब समुद्री यातायात की संभावना बढ़ गई है। यह नया समुद्री मार्ग पूर्वी चीन सागर को उत्तरी यूरोप व अटलांटिक सागर को जोड़ता है।

लाल रंग में नार्थ सी रूट तथा नीले रंग में परम्रागत समद्री मार्गः मानिचत्र साभार- फर्स्ट पोस्ट

एशिया तथा यूरोप के बीच समुद्री यातायात के लिये नार्थ सी रूट परम्परागत रूट  की तुलना में कम समय व कम लागत वाला है। एशिया तथा युरोप के बीच वर्तमान में एक मात्र समुद्री मार्ग लाल सागर- स्वेज नहर- भूमध्य सागर से होकर गुजरता है, जिसमें समुद्री मार्गसे लगभग 40 दिन का समय लगता है। नार्थ सी रूट से एशिया व यूरोप के बीच यातायात केवल 24-25 दिन में तय किया जा सकता है। दूरी के हिसाब से भी नार्थ सी रूट 40 स्वेज नहर वाले रूट से 40 प्रतिशत कम दूरी का है। अतः इस नये रूट को लेकर चीन, भारत, अमेरिाका, तथा यूरोपीय देश सभी प्रयासरत हैं। इस प्रकार भविष्य में नार्थ सी रूट एशिया तथा यूरोप के बीच समुद्री यातायात के लिये एक महत्वपूर्ण मार्ग होगा।

भारत की रूचि

भारत ने भी हाल के वर्षों में समुद्री सम्पर्कता के नये मार्गों के विास में रूचि दिखाई है। भारत के लिये यातायात का यह मार्ग उत्तरी यूरोप, कनाडा, अमेरिका तथा रूस के साथ व्यापार में लाभदायक सिद्ध होगा। वर्तमान में भारत रूस से अपनी आयात का 48 प्रतिशत तेल रूस से आयात करता ळै तथा रूस के अधिकांश तेल व गैस क्षेत्र उत्तरी समुद्री मार्ग के तट पर ही स्थित हैं। इसीलिये भारत इस मार्ग के प्रयोग में रूचि रखता है। भारत ने इस दिशा में तीन तरह के प्रयास किये हैं-

  1. चूंकि यह मार्ग आर्किटक क्षेत्र से गुजरता है, भारत ने आर्कटिक क्षेत्र का प्रबन्धन करने वाली आर्कटिक परिषद में 2013 में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त कर लिया है। आर्कटिक परिषद में आठ वही देश सदस्य है जिनकी आर्कटिक समुद्र से समुद्री  मिलती हैं।
  2. भारत ने मार्च 2022 में अपनी आर्कटिक नीति की घोषणा की है जिसमें अन्य बातों के अतिरिक्त आर्कटिक क्षेत्र में मौसम संबन्धी शोध, वहां के प्राकृतिक संसाणनों, तथा सम्पर्कता के विास पर जोर दिया गया है। इस प्रकार समुद्री यातायात का विकास इस नीति का अहम हिस्सा है।
  3. भारत द्विपक्षीय स्तर पर उस क्षेत्र के देशों जैसे नार्वे तथा रूस के साथ अपनी आर्कटिक नीति को लागू करने का प्रयास कर रहा है। भारत व रूस इसके अतिरक्त चैन्नाई तथा ब्लाडीवास्टक (रूस) के बीच एक अन्य समुद्री मार्ग का विकास कर रहे हैं। ब्लाडीवास्टक रूस के पूर्ची क्षेत्र में स्थित है तथा यह नार्थ सी रूट को पूर्वी चीन सागर में जोड़ता है।

उत्तरी समुद्र मार्ग की बाधायें

उत्तरी समुद्री मार्ग अभी पूरी तरह संचालित नही हुआ है। इसमें कई तरह की बाधायें हैं-

  1. उत्तरी समुद्री मार्ग में अभी विकसित बन्दरगाहों  व अन्य ढ़ांचागत सुविधाओं की कमी है।
  2. अभी भी इस मार्ग में कई बार बिना मौसम बर्फ आ जाती है जिसको पार करने के व्यापारिक जहाजों के साथ आइसब्रेकर मशीनों की भी जरूरत होती है। ऐसी मशीने  अभी सीमित मात्रा में रूस के ही पास हैं। अतः रूस के सहयेाग के बिना यातायात संभव नही है।

इस प्रकार अभी उत्तरी समुद्र मार्ग पूरी तरह सुरक्षित नही है तथा मेसम की अनिश्चितता तथा ढा़चागत सुविधाओं के अभाव में इस मार्ग को पूरी तरह संचालित होन में समय ल्रेगा। चीन भी इस मार्ग का प्रयोग करने के लिये प्रयासरत है तथा सको रूस से पर्यापत सहयेाग भी प्रापत हो रहा है। दूसरा चीन की स्थिति इस मार्ग का प्रयोग करने के लिये अधिक अनुकूल है।

Leave a Reply

Discover more from PSIR Simplified

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading