‘अमेरिका फर्स्ट‘ के बाद अब ‘बांग्लादेश फर्स्ट‘- भारत-बांग्लादेश संबन्धों में नया तनाव

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने 2025 में अमेरिका फर्स्ट की नीति अपनाई तथा उन्होंने, अन्य बातों के अलावा, अमेरिकी के लाभ के लिये तमाम देशों पर मनमानी कस्टम ड्यूटी लगाने की घोषणा की। भारत भी प्रभावित हुआ, क्योंकि अगस्त 2025 में उन्होंन अमेरिका में भारत के निर्यात पर 100 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगाई थी। एक साल के बाद भी दोनों देशों के बीच कोई व्यापरिक समझौता नही हो सका है।

तारिक रहमान सरकार की बांग्लादेश फर्स्ट नीति

अब भारत की विदेशनीति को बांग्लादेश में नई चुनौतियों को समाना करना पड़ रहा है। पांच अगस्त, 2024 मे शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी की सरकार के पतन के बाद फरवरी 2026 तक वहां मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अन्तरित सरकार कार्यरत थी। फरवरी 2026 के  चुनावों के बाद तारिक रहमान के नेतृत्व में बाग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार बनी है। भारत जहां अपने पड़ोसियों के साथ ‘पड़ोस पहले‘ (नेबरहुड फर्स्ट) की नीति पर चल रहा है वहीं बांग्लादेश की नई सरकार ने फरवरी, 2026 में बाग्लादेश फर्स्ट की नीति की घोषणा की है। इस नीति में देशों में संप्रभु समानता, बांग्लादेश के घरेलू मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का विरोध, सामरिक तथा आर्थिक मामलों में बांग्लादेश की नीतिगत स्वायत्तता, तथा चीन, भारत तथा यूरोपीय देशों के साथ संन्तुलित संबन्धों की स्थापना पर जोर दिया गया है। इस नीति में स्वायत्तता, आन्तरिक मामलों में अहस्तक्षेप तथा संतुलन की बात तारिक रहमान सरकार की इस मान्यता पर आधारित है कि उनके पहले शेख हसीना के कार्यकाल (2009-2024) में  बांग्लादेश की सरकार की विदेशनीति भारत से नियंत्रित थी तथा भारत बांग्लादेश के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप करता था। अतः अब बांग्लादेश को भारत से स्वायत्त रहकर स्वतंत्र व संन्तुलित नीति अपनाने की आवश्यकता है। देखने में तो यह नीति निष्कपट लगती है, लेकिन इसकी भावना भारत-विरोधी है। यह बात गत 6 माह में बांग्लादेश की विदेशनीति के व्यवहार से सिद्ध हो जाती है, जिसको हम दोनो देशों के बीच वर्तमान तनावों से समझ सकते हैं।

भारत व बांग्लादेश के बीच वर्तमान तनाव

भारत व बांग्लादेश के बीच कई मामलों को लेकर तनाव बना हुआ है-

  1. शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग

बांग्लादेश की नई सरकार ने भारत में निवास कर रही वहां की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापिसी की मांग की है। उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त, 2024 को सरकार के पतन के बाद शेख हसीना भारत चली आयी थी तथा तब से वे भारत में निवास कर रही हैं। उनकी अनुपस्थिति में शेख हसीना को नर संहार के आरोप में बांग्लादेश में मौत की सजा सुनाई गयी है। अब बांग्लादेश की सरकार ने उनकी भारत की वापिसी को एक नया मुद्दा बना लिया है। अन्तर्राष्ट्रीय कानून में इस प्रकार का प्रत्यर्पण दोनो देशों बीच सन्धियों के आधार पर होता है। बांग्लादेश व भारत के बीच 2013 में प्रत्यर्पण की संन्धि हुई थी, जिसमें साफतौर पर उल्लेख है कि राजनीतिक अपराधियों का प्रत्यर्पण नही किया जायेगा। फिर भी जानबूझकर बांग्लादेश की सरकार इस मामले को तूल दे रही है।

भारत ने बांग्लादेश के वर्तमान प्रधानमंत्री तारिक रहमान को  बिम्सटेक का वर्तमान अध्यक्ष होने के नाते 2-3 सितम्बर को भारत में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया था, लेकिन तारिक रहमान ने यह कहकर भारत आने से मना कर दिया कि जब तक भारत शेख हसीना को वापिस नही भेजेगा तब तक वे भारत की यात्रा पर नही आयेंगे। इस प्रकार की शर्त जानबूझकर संबन्धों में गतिरोध पैदा करने वाली है।

  • बांग्लादेश में चीन की सामरिक घुसपैठ

तारिक रहमान ने पहले से चली आ रही परम्परा को तोड़कर अपनी पहली विदेश यात्रा जून 2026 में मलेशिया व चीन में की है। अभी तक यह परम्परा कायम थी कि बांग्लादेश के नये प्रधानमंत्री अपनी पहली विदेश यात्रा भारत में करते रहे थे।

जून 2026 की चीन की यात्रा के दौरान बांग्लादेश च चीन के बीच अन्य बातों के अलावा निम्न मामलों पर समझौता हुआ है-

  1. चीन द्वारा तीस्ता नदी के जल प्रबन्धन का समझैाता– इसमें चीन तीस्ता नदी के जल प्रबन्ध के लिये भारत की सीमा के नजदीक इस प्राजेक्ट को क्रियान्वित करेगा।
  2. चीन- बांग्लादेश- म्यांमार हार्इ वे का निर्माण- दोनो देशों के बीच इस बात पर भी सहमति बनी है कि वे म्यांमार होते हुये दोनो के बीच एक हार्इवे का निर्माण करेंगे। यह हाईवे भी भारत के निकट से गुजरेगा।
  3. मोंगला बन्दरगाह में चीन द्वारा ढ़ाचागत सुविधाओं का विकास– बंगाल की खाड़ी में स्थित इस सामरिक बन्दगाह के आस-पास चीन ढ़ांचागत सुविधाओं का विकास करेगा।

ये तीनो ही परियोजनायें सामरिक दृष्टि से भारत के लिये चिन्ता का विषय हैं।

मानचित्र साभार- भास्कर इंगलिश

3.तनाव के अन्य बिन्दु

इसके अलावा दोनो देशों के बीच तनाव के कतिपय अन्य बिन्दु भी विद्यमान हैं। पहला, बांग्लादेश में निवास कर रहे हिन्दुओं की सुरक्षा का मामला है। 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद वहां राजनीति में अतिवादी पार्टी जमात ए इस्लामी का प्रभाव बढ़ गया है, जिससे वहां पर हिन्दुओं के प्रति भेद-भाव व हिंसा की घटनायें भी बढ़ गयी हैं। भारत ने कई बार इस मामले में अपना विरोध दर्ज कराया है। दूसरा, दिसम्बर 1996 में दोनो के बीच 30 वर्ष के लिये ऐतिहासिक गंगा जल बंटवारा समझौता हुआ था, जिसकी अवधि दिसम्बर 2026 में समाप्त हो जायेगी। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण गंगा नदी में जल प्रवाह कम हो गया है, अतः भारत इस समझैाते में संशोधन चाहता है, जिसके लिये बांग्लादेश तैयार नही है। इसके अलावा सीमा पर अवैध घुसपैठ दोनो देशों के बीच एक नरन्तर चलने वाला मुद्दा है।

उक्त तनावों के चलते दोनो देशों के बीच उच्च स्तरीय बात-चीत के आसार कम हो गये है तथा निकट भविष्य में इन तनावों के कम होने की संभावना नही दिखती। इसका करण यह है कि बांग्लादेश की वर्तमान सरकार ने चीन व पाकिस्तान के साथ अपने संबन्धों को मजबूत बनाने की नीति अपनाई है, जिसे बांग्लादेश फर्स्ट नीति के अन्तर्गत अंजाम दिया रहा है। उक्त तीनो देशों के बीच भविश्य में एक त्रिपक्षीय सहयोग संगठन भी बन सकता है, जिसके लये चीन तथा पाकिस्तान दोनो प्रयासरत हैं।   

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