शंघाई सहयोग संगठन (एस0 सी0 ओ0) क्या है? भारत की शंघाई सहयोग संगठन में क्या भूमिका है ?

शंघाई सहयोग संगठन का विकास व उद्देश्य

शंघाई सहयोग संगठन सेण्ट्रल एशिया का एक क्षेत्रीय सहयोग संगठन है। सेण्ट्रल एशिया को पश्चिमी समीक्षकों द्वारा यूरेशिया भी कहा जाता है। शंघाई सहयोग संगठन की शुरूआत 1996 में शंघाई फाइव के नाम से पांच देशों द्वारा की गई थी- रूस, चीन, किरगिस्तान, कजाखस्तान, तथा ताजकिस्तान। शंघाई फाइव का आरंभिक उद्देश्य इस क्षेत्र में सुरक्षा की तीन चुनौतियों- आतकवाद, उग्रवाद तथा अलगाववाद- के समाधान में सदस्य देशों के बीच  सहयोग को बढ़ाना था।

वर्ष 2001 इस संगठन में उजबेकिस्तान भी शामिल हुआ। अतः इसका नाम बदलकर शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization) कर दिया गया। इसका मुख्यालय पहले की भांति शंघाई में ही बना रहा। अगले वर्ष 2002 में शंघाई सहयोग संगठन का चार्टर स्वीकार किया गया। इस चार्टर के अनुच्छेद 1 में इसके उद्देश्यों  का विस्तार किया गया। इस अनुच्छेद के अनुसार शंघाई सहयोग संगठन के निम्न मुख्य लक्ष्य बताये गये-

  1. सदस्य देशों के बीच मित्रता व विश्वास को मजबूत करना।
  2. इस क्षेत्र में शान्ति, सुरक्षा व स्थिरता के लिये सहयोग को मजबूत करना।
  3. इस क्षेत्र की प्रमुख सुरक्षा चुनौतियां जैसे आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद, नशीली दवाओं तथा हथियारों के अवैध व्यापार आदि के समाधान में सदस्यों के बीच सहयोग को बढ़ाना।
  4. इस क्षेत्र में आर्थिक विकास, तकनीकी विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा संस्कृति आदि के क्षेत्र में सदस्यों के मध्य सहयेाग को बढ़ाना।
  5. अन्य देशों व संगठनों के साथ अन्तर्राष्ट्रीय संबन्धों का विकास करना।

सदस्यता का विस्तार

2001 में शंघाई सहयोग संगठन में केवल 6 सदस्य देश थे। बाद में इसकी सदस्यता का विस्तार हुआ है। वर्ष 2017 में रूस के प्रस्ताव पर भारत  तथा चीन के प्रस्ताव पर पाकिस्तान को इसकी सदस्यता प्राप्त हुई। 2023 में ईरान तथा 2024 में बेलारूस ने शंघाई सहयोग संगठन की सदस्यता प्राप्त की। इस प्रकार वर्तमान में इसके 10 सदस्य देश हैं। इसके अलावा शंघाई सहयोग संगठन में वर्तमान में दो पर्यवेक्षक देश तथा 15 वार्ताकार देश शामिल हैं।  

शंघाई सहयोग संगठन की सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था राष्ट्राध्यक्षों का शिखर सम्मेलन है जिसकी बैठक प्रतिवर्ष होती है। शंघाई सहयोग संगठन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रैट्स (RATS- Regional Anti-Terrorism Structure) अर्थात आतंकवादरोधी क्षेत्रीय संगठन है जिसका मुख्यालय उजबेकिस्तान की राजधानी ताशकन्द में है। यह संगठन आतंकवादरोधी गतिविधियों में सदस्यों के बीच समन्वय व सहयोग प्रदान करता है।

शंघाई सहयोग संगठन में भारत की भूमिका

शंघाई सहयोग संगठन सेण्ट्रल एशिया का क्षेत्रीय सहयोग संगन है। भारत सेण्ट्रल एशिया को अपना विस्तारित पड़ोस (Extended Neighbourhood) मानता है। इस क्षेत्र में भारत के आर्थिक तथा सुरक्षा संबन्धी हित संलग्न है। आर्थिक हितों में व्यापार तथा निवेश के अलावा भारत इन देशों के प्राकृतिक संसाधनों जैसे कजाखस्तान में यूरेनियम तथा तेल और उजबेकिस्तान में यूरेनियम आदि में भी रूचि रखता है। भारत के सुरक्षा संबन्धित हित इस क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों, जैसे आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद, नशीली दवाओं तथा हथियारों के अवैध व्यापार आदि के समाधान को लेकर हें।

शंघाई सहयोग संगठन में भारत की भूमिका को निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत समझा जा सकता है-

  1. भारत ने  2005 में शंघाई सहयोग संगठन में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त किया था।
  2. 2017 में भारत ने शंघाई सहयोग संगठन की सदस्यता प्राप्त कर ली है।
  3. 2018 में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन में सेक्योर (SECURE- Security, Economic Development, Connectivity, Unity, Respect for Sovereignty and Territorial Integrity,  and Environment Protection) के माध्यम से अपनी प्राथमिकताओं व नीति को स्पष्ट किया था। भारत के सेक्योर दृष्टिकोण में सुरक्षा, संपर्कता, आर्थिक विकास, तथा पर्यावरण संरक्षण सभी महतवपूर्ण बिनदु शामिल हैं। भारत आज भी इसी नीति पर काम कर रहा है।
  4. भारत ने पहली बार जुलाई 2023 में भारत में शंघाई सहयोग संगठन के राष्ट्राध्यक्षों का शिखर सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें ईरान को नये सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। यह सम्मेलन आनलाइन मोड में आयोजित किया गया था।
  5. 2017 में शंघाई सहयोग संगठन का सदस्य बनने के बाद भारत के प्रधानमंत्री ने 2024 को छोड़कर प्रतिवर्ष सभी शिखर सम्मेलनों में भाग लिया है।
  6. शंघाई सहयोग संगठन का 26वां शिखर सम्मेलन 31 अगस्त व 01 सितम्बर 2026 को किरगिस्तान की राजधानी बिस्केक में संपन्न हुआ है। इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने भाग लिया है तथा तीन मुद्दों- सुरक्षा, संपर्कता व नये अवसरों पर विशेष जोर दिया है। उन्होने इस क्षेत्र की तीन चुनौतियों- आतंकवाद, उग्रवाद तथा अलगाववाद के समाधान केलिये सदस्य देशों के मध्य सहयेाग बढ़ाने पर भी जोर दिया है। इस सम्मेलन में भाग लेने के पहले निरन्तरता में 30 व 31 अगस्त, 2026  को मोदी ने उजबेकिस्तान की यात्रा की थी, जिसमें दोनो देशों ने अपने संबन्धों को सामरिक साझेदारी के स्तर से बढ़ाकर व्यापक सामरिक साझेदारी के स्तर तक करने का निर्णय लिया है।

एस0 सी0 ओ0 के 2026 सम्मेलन में मोदी। चित्र साभारः फेसबुक

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