विश्व युद्ध के बाद नई विश्व राजनीतिक व्यवस्था के प्रबन्धन के लिये 1945 में संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी।
इसी तरह नई विश्व आर्थिक व्यवस्था के प्रबन्धन के लिये अमेरिका के हैम्पशायर राज्य के ब्रेटन वुड्स शहर में 1 से 22 लुलाई 1944 को एक सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन में 44 देशों ने भाग लिया था। इसी सम्मेलन में इन्टरनेशनल बैंक फार रिकान्स्ट्रक्शन एन्ड डेवलपमेंट (विश्व बैंक) तथा अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना का निर्णय लिया गया था। इसीलिये इन दोनो संस्थाओं को ब्रेटन वुड्स संस्थाओं के नाम से जाना जाता है। इन दोनो संसथाओं का मुख्यालय वाशिंगटन मे स्थित है।
ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में दुनिया की मुद्राओं को अमेरिकी डालर से जोड़ने का निर्णय भी लिया गया था तथा एक डालर की कीमत 35 आउन्स सोने के बराबर निर्धारित की गई थी। इसमें एक ऐसा फ्रेमवर्क लाने की प्रयास किया गया था, जिससें 1929 की वैश्विक मंदी को दोबारा आने से रोका जा सके। उल्लेखनीय है कि 1973 में विश्व की मुद्राओं को अमेरिकी डालर से डिलिंक अथवा अलग कर दिया गया था। वर्तमान में यही व्यवस्था लागू है।
यह भी उल्लेखनीय है कि गैट (GATT) की स्थापना 1948 में एक अलग सम्मेलन के द्वारा की गई थी। अतः गैट को बेटन वुड्स संस्था नही माना जाता है।
विश्व बैक समूह
बाद से विश्व बैक से संबन्धित अन्य संस्थाओं की भी स्थापना हुई है। निम्नलिखित पांच संस्थाओं को विश्व बैक समूह में शामिल किया जाता है-
- इन्टरनेशनल बैंक फार रिकान्स्ट्रक्शन एन्ड डेवलपमेंट (विश्व बैंक)– यह सभी सदस्य देशों को विकास योजनाओं के लिये दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराता है। आरंभ में इसका ध्यान यूरोप की अर्थव्यस्थाओं के पुनर्निर्माण पर था लेकिन अब यह गरीबी निवारण, तथा साझा संपन्नता के लिये विकास कार्यों को ऋण पद्रान करता है।
- इन्टरनेशनल विकास एसोसिएशन- यह गरीब देशों के की विकास योजनाओं को दीर्घकालीन सस्ता ऋण उपलब्ध कराती है इसीलिये इसे विश्व बैक की साफ्टलोन विन्डो भी कहा जाता है।
- इन्टरनेशनल फाइनेन्स कारपोरेशन- यह सदस्य देशों की निजी क्षेत्र कम्पनियों को ऋण की सुविधा प्रदान करता है।
- मल्टीलैटरल इन्वेस्टमेंट गारन्टी एजेन्सी- 1988 में स्थापित यह एजेन्सी एक देश द्वारा दूसरे देश में निवेश किये जाने पर राजनीतिक असुरक्षा से निवेश को बीमा की सुविधा प्रदान करती है। उल्लेखनीय है कि यह वित्तीय असुरक्षा की कोई गारन्टी नही देती, इसके द्वारा केवल राजनीतिक रिस्क् को कवर किया जाता है।
- इन्टरनेशनल सेन्टर फार सेटलमेंट आफ इन्वेस्टमेंट डिस्पुट- 1966 में स्थापित विश्व बैक समूह की यह संस्था देशों के बीच निवेश से होने वाले विवादों के निबटारे का एक मंच है।
विश्व बैक तथा अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में क्या अन्तर है?
- विश्व बैक द्वारा विकास योजनाओं व गरीबी निवारण कार्यक्रमों के लिये ऋण की सुविधा दी जाती है। दूसरी ओर अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा केवल भुगतान असुन्तलन की स्थिति में किसी देश में विदेशी मुद्रा की कमी को पूरा करने के लिये ऋण दिया जाता है।
- विश्व बैक दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराता है, जबकि अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के ऋण भुगतान की अवधि अधिकतम 3-5 वर्ष होती है।
- दोनो के द्वारा ही ऋण देते समय कतिपय शर्तें आरोपित की जाती है, लेकिन दोनो में अन्तर है। विश्व बैक दीर्घकालीन विकास को सुनिश्चत करने के लिये शर्तें लगाता है, जबकि अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष अल्पकालीन वित्तीय तथा आर्थिक स्थिरता केा ध्यान में रखकर शर्तें लगाता है।

चित्र साभार-सुपरकलाम
क्या भारत भारत ब्रेटन वुड्स संस्थाओं का संस्थापक सदस्य है?
भारत ने 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में भाग लिया था। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सर जेरेमी रायसमैन ने किया था। इस प्रतिनिधि मंडल के अन्य सदस्य थे- भारतीय रिजर्व बैंक के पहले भारतीय गवर्नर सी0 डी0 देशमुख, आर0 के0 शनमुखम शेट्टी, तथा ए0 डी0 श्राफ। इस सम्मेलन में विश्व बैंक की स्थापना का मुख्य उद्देश्य द्विदतीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप का पुनर्निर्माण करना था। लेकिन भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इसके उद्देश्यों में गरीबी निवारण तथा विकास को भी शामिल करने की वकालत की, जो अब इसके उद्देश्यों में शामिल है। इसीलिये इस विश्व बैंक का आधिकारिक नाम इन्टरनेशनल बैंक फार रिकान्स्ट्रक्शन एन्ड डेवलपमेंट रखा गया है।
ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में भाग लेने के कारण भारत को विश्व बैंक तथा अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का संस्थापक सदस्य माना जाता है।
इसके बाद 1948 में गैट (GATT) की स्थापना के लिये हुये 23 देशों के एक अलग सम्मेलन में भी भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया था। इसीलिये भारत गैट का भी संस्थापक सदस्य देश है।
ब्रेटनवुड्स संस्थाओं का संयुक्त राष्ट्र से क्या सम्बन्ध है?
उल्लेखनीय है कि विश्व बैक तथा अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना संयुक्त राष्ट्र के बाहर की गई है तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर में इनका उल्लेख नही है। लेकिन 1947 मे विश्व बैक व अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा सुयक्त राष्ट्र के बीच दो अलग- अलग एसोसिएसन समझौते हुये थे, जिनके द्वारा विश्व बैक तथा अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष को संयुक्त राष्ट्र की एजेन्सी की मान्यता दी गई है। लेकिन इसी समझौते में विश्व बैक व अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष को कार्य करने की पूरी स्वयत्तता भी प्रदान की गई है।
अतः वर्तमान में विश्व बैक तथा अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष दोनो संयुक्त राष्ट्र की एजेन्सियों के रूप में कार्यरत हैं।

चित्र सामार- यू0 एस0 आफिस आफ वार इन्फारमेशन
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