फिपिक(FIPIC) क्या है? यह किस प्रकार भारत की एक्ट ईस्ट नीति के क्रियान्वयन में सहायक है?

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सन्दर्भ

प्रशान्त महासागर के  मध्य तथा पूर्व में स्थित छोटे द्वीपीय देश वर्तमान में बड़ी शक्तियों के बीच प्रभाव बढ़ाने की प्रतियोगिता का अंग बने हुये हैं। इस क्षेत्र में कुल 14 प्रशांत द्वीपीय देश हैं – कुक आइलैंड्स, फिजी, किरिबाती, मार्शल आइलैंड्स, माइक्रोनेशिया, नाउरू, नीयू, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, समोआ, सोलोमन द्वीप, टोंगा, तुवालु और वानुआतु।

Image Courtesy: Britannica

चीन ने हाल के वर्षों में इन देशों में अपने सामरिक तथा आर्थिक प्रभाव का विस्तार किया है। उदाहरण के लिये चीन ने सोलोमन आइलैंड्स के साथ सुरक्षा समझौता किया है।  चीन अपनी बी0 आर0 आई0 योजना के तहत इस क्षेत्र में ढा़ंचागत सुविधाओं में निवेश कर रहा है, तथा अपने नौसैनिक अभ्यासों से शक्ति प्रदर्शन कर रहा है। चीन का उद्देश्य इस क्षेत्र में अपना सामरिक प्रभाव बढ़ाने के साथ-साथ इन देशों को ताईवान से अलग करना है। उदाहरण के लिये चीन के प्रभाव में आकर सोलोमन आइलैंड्स, किरबाती तथा नाउरू ने ताईवान से अपने कूटनीतिक संबन्ध समाप्त कर लिये है तथा उसकी स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता भी समाप्त कर दी है।

चीन की उक्त गतिविधयों से उस क्षेत्र के प्रमुख देश जैसे आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान तथा अमेरिका भी चिन्तित हैं। प्रतिक्रियास्वरूप इन देशों ने इंगलैंड के साथ मिलकर चीन के प्रभाव को रोकने के लिये 2022 में पार्टनर इन ब्लू पैसफिक नामक पहल की है। इसका उद्देश्य प्रशान्त द्वीपीय देशों के सजथ आर्थिक तथा कूटनीतिक सहयेाग को बढ़ाना है।

इसके अलावा क्वाड ने भी इन देशों में ढ़ाचागत सुविधाओं के विकास की पहल की है।

भारत 1991 में पूर्वी एशिया के देशों के साथ बहुआयामी साझेदारी को बढ़ाने के लिये पूरब की ओर देखो की नीति लागू की है, जिसे 2014 के बाद एक्ट ईस्ट नीति के नाम से जाना जाता है। भारत द्वारा इसी परिप्रेक्ष्य में प्रशान्त द्वीपीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिये फिपिक नामक पहल की गई है। इस प्रकार भारत भी इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिये बड़ी शक्तियों की दौड़ में शामिल हो गया है।

फिपिक अर्थात भारत- प्रशान्त द्वीप सहयोग मंच

फिपिक अर्थात भारत- प्रशान्त द्वीप सहयोग मंच (FIPIC- Forum for India- Pacific Islands Cooperation) भारत तथा प्रशान्त महासागर के  मध्य तथा पूर्व में स्थित 14 द्वीपीय देशों के साथ सहयोग का एक नया मच है। भारत इस मंच के माध्यम से इन देशों के साथ आर्थिक सहयोग तथा विकास साझेदारी को मजबूत करना चाहता है।

फिपिक के अब तक तीन शिखर सम्मेलन हो चुके हैं, जिनमें भारत के प्रधानमंत्री के अलावा इन देशों के शासनाध्यक्षों ने भाग लिया है-

फिपिक का पहला शिखर सम्मेलन 19 नवम्बर 2014 को फिजी की राजधानी सुआ में संपन्न हुआ था। इस सम्मेलन में इन देशों के साथ विकास साझेदारी को मजबूत करने के लिये प्रधानमंत्री मोदी ने कई नई पहलों की घोषणा की थी, जैसे- जलवायु अनुकूलन कार्यक्रमों के लिये 1 मिलियन के विशेष कोष की स्थापना, भारत में इन देशों के लिये अलग व्यापार कार्यालय की स्थापना, बेहतर सम्पर्कता के लिये पैनपैसफिक ई-नेटवर्क की स्थापना, इन देशों के राजनयिकों को प्रशिक्षण, तथा अन्तरिक्ष तकनीकि में सहयोग आदि।

फिपिक का दूसरा शिखर सम्मेलन 21 अगस्त 2015 को जयपुर में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में भारत ने नीली अर्थव्यवस्था में दोनो पक्षों में सहयेाग पर चर्चा की तथा इनमें से किसी देश में भारत के स्पेस अप्लीकेशन सेण्टर की स्थापना का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने नौसेनाओं की मित्रता यात्रा तथा तटीय निगरानी व जल विज्ञान में शोध के क्षेत्र में सहयोग की भी घोषणा की थी। प्रशान्त द्वीपीय देशों ने इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में  भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन किया।

फिपिक का तीसरा शिखर सम्मेलन 22 मई 2023 को पापुआ न्यू गायना की राजधानी पार्ट मार्शबाई में संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने इन देशों के साथ विकास साझेदारी का विस्तार करने के लिये 12 सूत्रीय योजना की घोषणा की। इस योजना में जल तथा स्वच्छ इनर्जी, स्वास्थ्य देखभाल, डिजिटल सहयोग, छोटे उद्योगों का विकास तथा अन्तरिक्ष व समुद्री सहयोग के कार्यक्रम शामिल हैं।

भारत की एक्ट ईस्ट नीति में फिपिक की भूमिका

भारत फिपिक के माध्यम से 14 पूर्वी एशिया के द्वीपीय देशों के साथ आर्थिक व विकास सहयोग का विस्तार कर रहा है। यह सहयोग भारत की एक्ट ईस्ट नीति का नया आयाम है। भारत ने अभी तक अपनी एक्ट ईस्ट नीति के अन्तर्गत मुख्यतः आसियान देशों के साथ सामरिक व आर्थिक सहयेाग को प्राथमिकता दी है। प्रशान्त द्वीपीय देशों की स्थिति सामरिक द़ष्टि से महत्वपूर्ण है। अतः अब भारत फिपिक के माध्यम से इन देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर अपनी एक्ट ईस्ट नीति का भी विस्तार कर रहा है। इसके अलावा फिपिक के माध्यम से भारत को इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को भी सन्तुलित करने में मदद मिलेगी।

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